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Title: सबसे कम उम्र में चुनाव लडऩे वाले युवा भारतीय
Author: Vinod Goswami
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नीरज अटानी भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक हैं। हाल ही इन्होंने 2020 में ओहियो स्टेट सीनेट का चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। इसके बाद ये यहां के...

नीरज अटानी भारतीय मूल के अमरीकी नागरिक हैं। हाल ही इन्होंने 2020 में ओहियो स्टेट सीनेट का चुनाव लडऩे का ऐलान किया है। इसके बाद ये यहां के तीसरे सबसे जबकि पहले भारतीय मूल के युवा उम्मीदवार होंगे। फिलहाल ये ओहियो स्टेट सीनेट में लगातार तीन बार से सदस्य हैं। कहते हैं कि जनता अपने सीनेट सदस्यों का चुनाव जनहित में काम के लिए करती है।

चुनाव लडऩे के ऐलान के बाद इन्होंने कहा है कि 1985 के दौर से रिपब्लिकन पार्टी ओहियो सीनेट क्षेत्र में मजबूत रही है। ये यहीं पर पैदा हुए हैं और यहीं के लोगों के साथ पले बढ़े हैं। ऐसे में ये यहां की सभी तरह की समस्याओं को अच्छे तरह से समझते हैं और निस्तारण भी जानते हैं। इन्होंने जनता को भरोसा दिलाया है कि वे हर हाल में उनकी सभी तरह की समस्याओं का हल निकालेंगे जिससे हर अमरीकी आदमी का सपना साकार होगा। इन्होंने कहा है कि समुदाय विशेष लोगों की उन सभी समस्याओं का समाधान किया जाएगा जिसका वे लंबे समय से सामना कर रहे हैं। सबसे मुख्य मुद्दा होगा शिक्षा, पानी, सुरक्षा और नौकरी जो आज का हर युवा चाहता है।

इन्होंने वादा किया है कि वे ओहियो क्षेत्र के 1 करोड़ 15 लाख लोगों की सुविधा के लिए कानून बनाएंगे जिससे उनकी समस्याओं का समाधान कम से कम समय में होगा। वादा किया है कि जीत के बाद उम्मीदों पर खतरा उतरेंगे।

पालतू श्वानों के लिए कानून
ओहियो में पालतू श्वान के काटने की वजह से एक बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद इन्होंने श्वान पालने वाले लोगों के लिए कानून बनाने की मांग करते हुए स्टेट हाउस में बिल पेश किया था। इसके बाद डॉग वार्डेन की नियुक्ति हुई जो अपने क्षेत्र के पालतू श्वानों की जानकारी रखेगा। कानून बना कि घरों के बाहर पालतू श्वान की चेतावनी लगी होनी चाहिए जिससे किसी व्यक्ति या बच्चे को कोई नुकसान न हो। पालतू श्वान के काटने से व्यक्ति के चोटिल या मृत्यु पर मुआवजा का नियम भी बना।

राजनीति शास्त्र में की है पढ़ाई
नीरज ने ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की है। 2014 में इन्होंने पहली बार डेमोक्रेट उम्मीदवार पैट्रिक मेरिस के खिलाफ चुनाव लड़ा था और 65.5 फीसदी मतों के साथ विजयी हुए थे। विवादों से भी इनका नाता रहा था। अमरीका में शूटआउट की घटनाओं के बाद इन्होंने छात्रों की सुरक्षा के लिए कहा था कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के छात्रों को राइफल ले जाने की आजादी दे देनी चाहिए जिसको लेकर इनकी आलोचना हुई थी। इसके बाद बयान वापस ले लिया था।



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