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Title: video- इस बार 281 करोड़ रुपए का होगा निगम का प्रस्तावित बजट
Author: Vinod Goswami
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विमल छंगाणी बीकानेर. शहर की सरकार के बजट पर साल दर साल चोट हो रही है। पवित्र दस्तावेज माने जाने वाले सालाना बजट को जिस रूप में पेश करते स...

विमल छंगाणी

बीकानेर. शहर की सरकार के बजट पर साल दर साल चोट हो रही है। पवित्र दस्तावेज माने जाने वाले सालाना बजट को जिस रूप में पेश करते समय सब्जबाग दिखाया जाता है उस पर बाद में जिम्मेदार खरे नहीं उतर रहे। जिन मदों से आय के प्रस्ताव होते है वहां से पूरी आय नहीं होती और जहां खर्च करना प्रस्तावित होता है वहां उसके अनुरूप खर्च नहीं किया जाता। पिछले तीन बजट प्रस्ताव और बाद में उनकी पालना का हश्र यही बानगी दे रहे है। अब एक बार फिर नगर निगम का सालाना बजट तैयार है। इस बार करीब २९० करोड़ के बजट प्रस्ताव तैयार किए गए है। दो दिन बाद निगम के सदन पटल पर बजट रखा जाएगा। निगम के वित्तीय वर्ष २०१८-१९ के प्रस्तावित बजट में कुछ मदों में आय होने का अनुमान लगाया गया। बाद में उन मदों से अनुमानित आय नहीं मिली। बजट में विवाह स्थल पंजीयन से १० लाख रुपए, मल निकासी से ५ लाख रुपए और अन्य अनुदान से ५० लाख रुपए प्राप्त होने थे लेकिन नहीं मिले।

 


गत 3 साल में बजट प्रस्तावों के हश्र पर एक नजर
वर्ष २०१६-१७
प्रस्तावित बजट- १५१.७ करोड़
वास्तविक खर्च- ७७.१२ करोड़
वर्ष - २०१७-१८
प्रस्ताव बजट- १९१.४४ करोड
वास्तविक खर्च- ९३.३३ करोड़
वर्ष - २०१८-१९
बजट स्वीकृत- २१२.५८ करोड़
वास्तविक खर्च- १७१.५१ करोड़

 


इसलिए फेल होता है बजट अनुमान
१. अनुमान के अनुरूप आय नहीं- बजट पेश करते समय अनुमानित आय को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया जाता है। इसके बाद सालभर अधिकारी-कर्मचारी इस ओर गंभीर नजर नहीं आते है। आय का आंकड़ा गड़बड़ाता है तो खर्च भी प्रस्ताव के अनुरूप नहीं कर पाते।
२. राजनीतिक रंग- सत्तारुढ बोर्ड की ओर से बजट पेश करते समय जनता को बडे-बडे सब्जबाग दिखाए जाते है। कार्य करवाने की घोषणाएं होती है। खर्च की तुलना में आय कम होने से घोषणा महज कागजी बनकर रह जाती है। बजट में कई घोषणाओं पर राजनीतिक रंग देखने को मिलता है।
३. प्राथमिकता तय नहीं- बजट पेश करते समय शहर की प्राथमिकताओं को ठीक से तय नहीं किया जाता। बाद में प्राथकिताएं बदल जाती है और प्रस्तावित बजट की गाड़ी पटरी से उतर जाती है। बजट तैयार करने से पहले जनता की राय ली जानी चाहिए।

 


रखा प्रावधान, राशि खर्च नहीं

नगर निगम के वित्तीय वर्ष २०१८-१९ के प्रस्तावित बजट में कई कार्यो के लिए राशि का प्रावधान रखा लेकिन, राशि खर्च नहीं हो पाई। निगम के व्यय विवरण के अनुसार बिजली के रख-रखाव का अनुबंध के लिए १० लाख रुपए, बिजली सामान की खरीद के लिए १५ लाख, निगम की ओर सार्वजनिक शौचालय व मूत्रालय निर्माण के लिए २० लाख रुपए, सड़क-नालियों का रख रखाव के लिए १ करोड रुपए, विद्युत सौन्दर्यकरण के लिए १० लाख रुपए, बकाया बिलों के भुगतान के लिए ५० लाख रुपए का प्रावधान किया, लेकिन इनके अनुसार किसी पर खर्च नहीं किया गया।

 


धरातल से दूर
निगम के पिछले चार वर्षों के बजट से शहर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है और ना ही निगम की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। संसाधनों की कमी बनी हुई है। बजट धरातल से दूर, महज कागजी नजर आता है। इस बार के बजट से भी शहर का वास्तव में भला होगा, हमें उम्मीद नहीं है। बजट के प्रस्ताव व प्रावधानों पर अमल ही नहीं होता है। इस बार के बजट से भी अधिक उम्मीदें पालना गलत होगा।
जावेद पडि़हार नेता प्रतिपक्ष

 

स्वीकृत काम होंगे शुरू
नगर निगम शहर के चहुमुंखी विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। निगम की ओर से स्वीकृत कार्य शुरू हों। चालू काम समय पर पूरे हों, इस पर बजट में ध्यान रहेगा। वहीं निगम क्षेत्र में तीसरे फायर स्टेशन को शुरू करवाना, निगम परिसर में नई बिल्डिंग के निर्माण और गोशाला को शुरू करने पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। सदन में प्रस्तुत किए जाने वाले बजट में शहर का हित समाहित होगा।
नारायण चौपड़ा, महापौर



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