लूणकरनसर. लूणकरनसर के नहरी क्षेत्र के गत एक पखवाड़े से पैंथर के खौफ में किसान खेतों में लाठियां लेकर फसल की रखवाली के साथ अपनी सुरक्षा करने का प्रयास कर रहे हैं। पैंथर के खेतों में ढाणियों के आस-पास घूमने के पदचिन्ह मिल रहे है। ऐसे में मवेशियों को बचाने के लिए रातभर पहरा दे रहे हैं। चक एक बीएचएम के विनोद कुमार ने बताया कि मंगलवार को चक २ बीएचएम में काश्तकार श्योकरण गोदारा की ढाणी के पास पैंथर के पदचिन्ह देखे गए तथा चक ३ बीएचएम के महावीर बिश्नोई की ढाणी के पास भी पदचिन्ह मिले हैं। वन विभाग के वनरक्षक रमणलाल पूनियां, वनपाल मोहम्मद वसीम, वनरक्षक हनुमान सींवर व बैलदार गोमदराम के दल ने दोनों जगह से जंगली जानवर के पीओपी मिट्टी से पदचिन्ह लिए है।
क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहरसिंह मीणा ने बताया कि पदचिन्ह के सैम्पल वन विभाग द्वारा जोधुपर भेजे जाएंगे तथा इससे पता चलेगा की, इलाके में जंगली जानवर किस प्रजाति का है। मंगलवार शाम चारणा वितरिका के पास चक २ बीएचएम में शाम करीब ५ बजे ग्रामीणों ने पैंथर को देखा। चक के नींबूराम भाट ने बताया कि शाम को कुत्ते से थोड़ा बड़ा जंगली जानवर देखा गया। उसके पूंछ लम्बी व शरीर भूरे रंग का था तथा जिस पर काले-काले धब्बे थे। इसके बाद में आस-पास के दर्जनों लोग एकत्र हो गए तथा हाथों में लाठियां लेकर घेरकर पकडऩे का प्रयास किया गया। लेकिन बाद में दिखाई नहीं दिया।
कार्मिक व अधिकारी कर रहे गुमराह
लूणकरनसर के नहरी क्षेत्र में एक पखवाड़े से आए जंगली जानवर किस प्रजाति का है। इस बारे में वन विभाग के कार्मिक व अधिकारी पता नहीं लगा सके है। हालांकि ग्रामीण इसे पैंथर बता रहे है। वहीं वन विभाग की टीम पैंथर नहीं होने की बात कर रही है लेकिन कौनसा जानवर है। इसके बारे में कभी विदेशी डॉग तो, कभी लकड़बग्घा (हाइना) बता रहे है तथा कभी जरख के पदचिन्ह बताकर ग्रामीणों को गुमराह किया जा रहा है। सोमवार रात को क्षेत्रीय वन अधिकारी मोहरसिंह मीणा, वनरक्षक विजयसिंह, गणेशाराम, बैलदार गोमदराम समेत कई कार्मिक जंगली जानवर को रात के अंधेरे में बिना संसाधन के पकड़े पहुंचे। किसान नेता धर्मवीर गोदारा ने बताया कि पैंथर को पकडऩे पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों के पास केवल एक टॉर्च के अलावा खुद की सुरक्षा के लिए कोई साधन नहीं था।
from Patrika : India's Leading Hindi News Portal http://bit.ly/2DekjDk
एक टिप्पणी भेजें