जयप्रकाश गहलोत/अतुल आचार्य/बीकानेर.
कहते हैं कि मन में अगर कुछ करने का जज्बा हो तो कुछ भी असंभव नहीं। फिर बात चाहे गंभीर बीमारी की ही क्यों न हो। यदि आदमी हिम्मत न हारे और मन में ठान ले कि इससे डरना नहीं लडऩा है तो वह उससे हराकर आगे बढ़ सकता है। कुछ इस तरह का बीकानेर के 58 वर्षीय राजेश शर्मा ने कर दिखाया है। करीब तीन महीने तक कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझने के बाद अब राजेश फिर से नई ऊर्जा व जोश के साथ अपनी जिंदगी को जी रहे हैं।
पत्नी व बड़े भाई ने बंधाई हिम्मत
राजेश बताते हैं कि वे डीआरएम (रेलवे) ऑफिस में चीफ सुपरिटेंडेंट के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष-2017 में उन्हें मुंह में तकलीफ हुई, जांचें कराई तो कैंसर का पता चला। एकबारगी कैंसर का पता चलने पर हिम्मत टूट गई। ऐसे लगा जैसे जिंदगी रेत की तरह मुठ्ठी से धीरे-धीरे फिसल रही है। इस मुश्किल घड़ी में पत्नी शारदा, बड़े भाई शंकरलाल और दोस्त रूपकिशोर व्यास ने हिम्मत बंधाई। 29 मार्च-2017 को जांचों में कैंसर स्पष्ट होने के बाद पत्नी, भाई और दोस्त की हिम्मत ने ऐसा जोश भरा कि फिर कभी कैंसर की बीमारी के बारे में सोचा ही नहीं। इस बीमारी को भी सर्दी-बुखार की तरह समझ इलाज कराया और पूर्णतया स्वस्थ हूं।
10 से 12 घंटे काम
पीडि़त राजेश बताते हैं कि कैंसर नहीं था तब ऑफिस के काम के अलावा अन्य कोई काम नहीं करता था लेकिन अब सोच रखा है कि जिंदगी में जितना करेंगे वह कम है। ऐसे में अब 10 से 12 घंटे काम करता हूं, नियमित ऑफिस जाता हूं। इसके अलावा सामाजिक कामों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेता हूं। इतना ही नहीं अब जब कभी मौका मिलता है तो कैंसर पीडि़त की आर्थिक व अन्य तरह से मदद भी करता हूं।
तीन महीने बाद फिर ज्वाइन कर ली नौकरी
राजेश की पत्नी शारदा देवी बताती है कि कैंसर का पता चला तब वे टूट चुके थे लेकिन बाद में हिम्मत ऐसी आई कि अब वे दूसरों को भी गंभीर बीमारियों से लडऩे के लिए हिम्मत बंधाते हैं। राजेश का 10 मई-2017 को ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के 71 दिन बाद ही राजेश ने दुबारा से ऑफिस ज्वाइन कर लिया। 21 जुलाई की सुबह वह सबसे पहले ऑफिस पहुंच गए। बाद में छोटी बेटी की शादी की तैयारियों में लग गए। 10 दिसंबर-17 को बेटी के हाथ पीले कर दिए।
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