नई दिल्ली। वेस्ट बंगाल में सीबीआई और ममता बनर्जी को लेकर चल रहे विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर ममता ने जहां सीबीआई की मिसयूज की बात कह कर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टी भी एक मंच पर आ खड़ी हुई हैं। यहां बड़ा सवाल यह है कि आखिर ममता बनर्जी ने सीबीआई-कोलकाता पुलिस मामले को लेकर धरने पर बैठने का फैसला लिया क्यों? राजनीतिक जानकारों की मानें तो सीबीआई और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के बीच चल रही खींचतान लोकसभा चुनाव का शंखनाद है। चौंकाने वाली बात सीएम ममता बनर्जी का राजीव कुमार के आवास पर पहुंचना और उनको सीबीआई के खिलाफ संरक्षण देना है। जबकि अपने किसी राजनीतिक सहयोगी को लेकर उन्होंने कभी ऐसा रुख नहीं
दिखाया।
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क्या है पूरा मामला
सियासी विश्लेशकों की मानें तो 2019 लोकसभा चुनावों से पहले ममता बनर्जी खुद को मोदी के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के बड़े चेहरे के तौर पर पेश करने के प्रयास में जुटी है। मोदी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठीं ममता ने दावा किया है कि उन्हें 24 दलों का समर्थन हासिल है। यही नहीं ममता बनर्जी ने धरने पर बैठने की घोषणा करते ही कई विपक्षी नेताओं से समर्थन की मांग की। इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ममता बनर्जी को समर्थन देने की कही है।
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आप को बता दें कि लोकसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी पार्टियों ने कोलकाता में सीबीआई कार्रवाई के खिलाफ जमकर हंगामा किया और इसे राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ एजेंसी का दुरुपयोग बताया, जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन को सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित करनी पड़ी थी।
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