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Title: डूबने से पिता-पुत्र व पुत्रवधू की मौत
Author: Vinod Goswami
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बीकानेर.लूणकरनसर. तहसील के गांव किस्तुरिया की रोही में चक २९८ आरडी के पास खेत में बुधवार शाम को पानी की डिग्गी में डूबने से एक ही परिवार क...

बीकानेर.लूणकरनसर. तहसील के गांव किस्तुरिया की रोही में चक २९८ आरडी के पास खेत में बुधवार शाम को पानी की डिग्गी में डूबने से एक ही परिवार के तीन जनों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक पिता-पुत्र और पुत्रवधू हैं। पुलिस के अनुसार लूणकरनसर के प्रभुसिंह राठौड़ के खेत में नकोदेसर निवासी हाल लूणकरनसर के वार्ड ३२ निवासी भंवरलाल नायक ने काश्त कर रखी थी। बुधवार शाम करीब ६ बजे बाद डिग्गी से भंवरलाल की पुत्रवधू लक्ष्मी (२३) पानी लाने गई थी। इस दौरान उसका पैर फिसल गया और वह डिग्गी में गिर गई। डिग्गी में पानी अधिक होने से वह डूबने लगी। ढाणी में खड़ा भंवरलाल नायक(५०) यह देखकर उसे बचाने के लिए डिग्गी में कूद गया। जब भंवरलाल व लक्ष्मी दोनों डूबने लगे तो उन्हें बचाने के प्रयास में लेखराम नायक(२४) भी डिग्गी में कूद गया और तीनों की डूबने से मौत हो गई।

 

पानी अधिक होने से नहीं बचा सके
हादसे की जानकारी आसपास के ग्रामीणों को मिलते ही वे मौके पर पहुंचे। डिग्गी में पानी आठ से दस फीट था, जिसके चलते तीनों नीचे चले गए थे, जिस कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। उन्हें डिग्गी से बाहर निकाला तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसे की सूचना मिलने पर गांव में शोक छा गया।

 

टॉर्च की रोशनी में पांच घंटे बाद निकाले शव
हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस वृत्ताधिकारी दुर्गपालसिंह राजपुरोहित, एसआइ रणजीराम गेधर, भाजपा मंडल अध्यक्ष राजपालसिंह शेखावत सहित अनेक लोग मौके पर पहुंचे लेकिन प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। डिग्गी में पानी की अधिक होने से शव दिखाई नहीं दे रहे थे। इस पर पुलिस ने जनरेटर की मदद से डिग्गी से पानी निकाला। रात में घना अंधेरा होने से भी बचाव कार्य में परेशानी हो रही थी। महज टॉर्च की रोशनी में शवों को ढूंढऩे का काम देर रात तक जारी रहा। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद शवों को बाहर निकाला जा सका। शवों को लूणकरणसर सामुदायिक स्वास्थ्य के मुर्दाघर में रखवाए गए हैं, जिनका गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम कराया जाएगा।

 

हादसों का कारण
२० से २५ फीट चौड़ी डिग्गी ऊपर से पूरी तरह खुली होती है। खुली डिग्गी में काई जम जाती है जिससे फिसलन होने लगती है। ऐसे में जब कोई डिग्गी में पानी लेने के लिए उतरने का प्रयास करता है तो वह फिसल कर गहरे पानी में चला जाता है।

 

ऐसे करें सुरक्षा
खेतों में पानी की डिग्गी बनाने के बाद चारों तरफ कांटेदार तार से सुरक्षा होनी चाहिए। डिग्गी के पास एक लोहे या लकड़ी का खूंटा लगाना चाहिए, जिससे एक मजबूत रस्सी को बांध कर रखें। जब पानी लेने या नहाने जाए तो डिग्गी में उतरते समय रस्सी पकड़ कर रखे ताकि पैर फिसलने पर डिग्गी में गिर जाए तो रस्सी की मदद से बाहर आ सके।

 

लगातार बढ़ रहे हादसे
पहले खेतों में पानी के लिए कुंडिया बनाते थे, जिसे ऊपर से बंद कर ढक्कन लगा देते थे। अब कुंडियों की जगह खेतों में डिग्गियां बनाई जाने लगी है जो काफी बड़ी होती है। २० से २५ फीट चौड़ी होती है और १५ से २० फीट गहरी होती है। इस डिग्गी का पानी खेतों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल और जरूरतों के काम लिया जाता है।

 


आंखों के सामने डूब गए घरवाले
घर के तीन लोग डिग्गी में में डूब रहे थे लेकिन परिवार के लोग बेबस। उन्हें बचाने का प्रयास किया लेकिन वे सफल नहीं हो सके। उनकी आंखों के सामने तीनों डूब गए। भंवरलाल के छोटे बेटे लक्ष्मण ने बताया कि जब भाभी लक्ष्मी डिग्गी में गिर गई तो उसे बचाने भाई लेखराम व पिता भंवरलाल उसे बचाने डिग्गी में कूद गए। उन्हें बचाने के लिए उसने व मां मूर्ति ने रस्सी डालकर काफी प्रयास किया लेकिन वे सफल नहीं हुए। इसके बाद शोर मचाकर गांव वालों को बुलाया।



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