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Title: मोदी सरकार के बजट पर कुशवाहा और मांझी का निशाना, आयकर छूट सीमा 8 लाख होनी चाहिए थी
Author: Vinod Goswami
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पटना। केंद्र की मोदी सरकार के अंतरिम बजट को लेकर अब पॉलिटिकल रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। एक तरफ एनडीए के सहयोगी और खुद बीजेपी के नेता इस...

पटना। केंद्र की मोदी सरकार के अंतरिम बजट को लेकर अब पॉलिटिकल रिएक्शन आने शुरू हो गए हैं। एक तरफ एनडीए के सहयोगी और खुद बीजेपी के नेता इस बजट की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं तो वहीं विपक्षियों ने बजट को लेकर नाखुशी जाहिर की है। इस बीच बिहार में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने बजट को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
कुशवाहा और मांझी ने बजट को बताया जुमला
कभी एनडीए के सहयोगी रहे इन दोनों दलों के प्रमुखों ने बजट को जुमला करार दिया है। रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने बजट को लेकर कहा है कि केंद्रीय बजट के जरिए लोगों को गुमराह किया गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने अंतरिम बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बजट पूर्णत: युवा विरोधी एवं किसानों को गुमराह करने वाला चुनावी भाषण है।
कुशवाहा ने बजट में गिनाई कमियां
उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि इस बजट में सरकार ने गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की कोई व्यवस्था नहीं की है और ना ही रोजगार सृजन के उपायों का कोई प्रस्ताव है और न किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने हेतु कृषि उत्पादन पर आधारित उद्योगों की स्थापना का कोई प्रावधान है।
- कुशवाहा ने कहा कि बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक, शोषित, वंचित एवं गरीब लोगों के लिए कुछ भी नहीं कहा गया है।
आयकर छूट की सीमा को आठ लाख किया जाना चाहिए था- मांझी
वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी ने भी बजट को निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने इस बजट भाषण को चुनावी भाषण बताते हुए कहा कि इसमें जितने भी प्रस्ताव दिए गए हैं, वह चुनावी जुमला है। उन्होंने आयकर में पांच लाख रुपये तक की छूट को कम बताते हुए कहा कि इसे आठ लाख रुपये तक किया जाना चाहिए था।


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