निखिल स्वामी/बीकानेर. प्रदेश के स्कूलों में सालभर में एक बार मां-शिक्षक बैठक भी होगी। इससे पहले एक साल में चार बार अध्यापक-अभिभावक बैठक होती थी, लेकिन अब साल में अध्यापक-अभिभावक बैठक तीन बार ही होगी और एक बार मां-शिक्षक बैठक भी होगी।
इसमें तीन बैठकों में पुरुष अभिभावक और एक बैठक में सिर्फ महिला अभिभावक ही बच्चों के साथ आएंगी। सरकार ने पिछले साल नई व्यवस्था के तहत स्कूलों में मां-शिक्षक बैठक शुरू की थी, लेकिन चुनाव के कारण यह बैठक नहीं हो पाई। अब पहली मां-शिक्षक बैठक छह मार्च को होगी।
सरकार की इस व्यवस्था के तहत हर तीन महीनों में अध्यापकों व अभिभावकों बैठक होती है। इसमें अभिभावक स्कूलों के विकास, विद्यार्थी की पढ़ाई व व्यवहार आदि की जानकारी लेते हैं। इस बैठक से बच्चों के शैक्षिणक विकास में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई थी।
अब साल में एक बार मां-शिक्षक बैठक होगी, ताकि मां को भी बच्चों की स्कूल में प्रोग्रेस का पता चल सके। इस बैठक में बच्चों की मां या दादी, चाची या घर की कोई महिला आ सकती है। इससे पहले एसएसए की ओर से स्कूलों में मां-बेटी सम्मेलन होते थे। इसमें चाय, नाश्ता भी दिया जाता था और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते थे।
ये तिथियां निर्धारित
शिविरा पंचांग के अनुसार साल में चार बार अध्यापक व अभिभावकों की बैठक होती है। ये बैठक दो जुलाई, 10 सितंबर, 7 दिसंबर व 30 अप्रेल को निर्धारित हैं। इस बार सात दिसंबर को चुनाव होने से यह बैठक नहीं हो पाई थी। अब यह बैठक 6 मार्च को होगी।
सिर्फ महिलाएं
स्कूलों में साल में एक बार मां-शिक्षक बैठक होगी। इसमें मां व घर की महिलाएं अपने बच्चे की प्रोग्रेस रिपोर्ट व अन्य जानकारियां लेंगी। इसमें सिर्फ महिलाएं व उनकी बच्चे ही आएंगे।
नथमल डिडेल, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा।
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