जयभगवान उपाध्याय. रमेश बिठू
बीकानेर.सींथल. जिले का छोटा सा सींथल गांव शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर सुर्खियों में आ गया है। यहां के २४ अभ्यर्थियों में से २३ ने शारीरिक शिक्षक परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हैं। इस गांव के ४५ युवा पहले से ही शारीरिक शिक्षक पद पर प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं। अभ्यर्थियों की इस उपलब्धि के पीछे गांव के भामाशाहों का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने ना केवल इसके लिए गांव के युवाओं को प्रेरित किया, बल्कि उन्हें अभ्यास के लिए स्टेडियम भी बनाकर दिया। आर्थिक सहयोग से गांव के बीच बने चांद भैरव खेल मैदान में हर रोज गांव के युवा अभ्यास करते हैं।
भैरूंदान सिंह ढायच ने दी थी जमीन
गांव में खेल स्टेडियम बनाने के लिए गांव के ही भैरूंदान सिंह ढायच ने अपने खेत के कुछ हिस्से को दान में दिया था। ग्रामीण बताते हैं कि भैरूंदान चाहते थे कि गांव के खिलाड़ी देश-विदेश में गांव का नाम रोशन करें। गांव के युवाओं ने उनकी मंशा को पूरा करने की भरसक कोशिश की। यही कारण था कि यहां से सबसे अधिक पीटीआइ बनकर निकले। भैरूंदान सिंह ढायच शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी रहे थे। गांव में खेल मैदान बनाने के लिए जमीन देने पर ग्रामीणों ने आर्थिक मदद एकत्रित कर यहां खेल मैदान की चारदीवारी और अन्य साजो-सामान उपलब्ध करवाया। करीब तीन साल पहले भैरूंदान ङ्क्षसह की मृत्यु हो गई।
चयनित खिलाड़ी हैंडबॉल में माहिर
जिन २३ खिलाडि़यों का चयन शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुआ वे सभी हैंडबॉल में माहिर हैं। चयनित खिलाडि़यों में रणजीत बीठू, पृथ्वी राज बीठू, प्रवीण सिंह बीठू, रवि बीठू, उम्मेद सिंह बीठू, खुमाण सिंह बीठू, देवी सिंह आढा, बलवंत बीठू, राम आढा, हरिश बीठू, प्रेम सिंह बीठू, सुरेंद्र आढा, अवधेश बीठू, आनंद बीठू, मधुसुदन बीठू, भवानी बीठू, बीरबल, राजू वासुदेव, राधाकृष्ण, अरुण आढा, घनश्याम उपाध्याय व लिटिल हैं। सभी अभ्यर्थियों ने अपनी सफलता के पीछे अपने माता-पिता का आशीर्वाद और बड़े-बजुर्गों की सोच को दिया है।
गांव में खुशी का माहौल
एक साल २३ शारीरिक शिक्षकों का चयन होने के बाद गांव में खुशी का माहौल है। गांव के हर दूसरे घर में मिठाइयां खिलाई जा रही है। सींथल गांव के पुलिस में कार्यरत प्रकाश दान चारण बताते हैं कि गांव के खिलाड़ी राज्य और अन्तरराष्ट्रीय खेलों में भाग ले चुके हैं। अभी तक गांव के ४५ युवा शारीरिक शिक्षक की नौकरी पा चुके है। वहीं सरकारी सेवाओं में मौका पाने वाले यहां युवाओं की संख्या अन्य गांवों के मुकाबले अधिक है। गांव की सरपंच शशि किरण बीठू ने युवाओं की इस उपलब्धि को अनुकरणीय बताया।
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