हनुमानगढ़. जिले में पाला पडऩे के कारण अरंडी की अधिकांश फसलें चौपट हो गई है। कृषि अधिकारियों की मानें तो जिले में करीब ८६०० हेक्टेयर में चालू वर्ष में अरंडी की बिजाई की गई थी। लेकिन जनवरी के अंतिम सप्ताह में ठंड का असर बढऩे के कारण बारानी क्षेत्र की असिंचित एरिया में लगी अरंडी की ज्यादातर फसलें खराब हो गई है। इस फसल में खराबे का प्रतिशत ८० से ९० प्रतिशत माना जा रहा है। फसल चौपट होने के कारण किसानों की उम्मीदें भी धराशायी हो गई है। आय बढ़ाने की उम्मीद में अरंडी की पैदावार करने वाले किसान अब फसल खराब होने के कारण काफी मायूस हैं। इस फसल की खासियत यह है कि पौधा तैयार होने पर वर्ष भर उपज मिलती है। परंतु विडम्बना है कि इस फसल को सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिसूचित नहीं किया हुआ है। इसके कारण प्रभावित किसानों को बीमा क्लेम भी नहीं मिल सकेगा। कृषि विभाग के सहायक निदेशक बलवीर खाती ने बताया कि नोहर में करीब १८०० हेक्टेयर में अरंडी की बिजाई की गई है। लेकिन मौसम का साथ नहीं मिलने के कारण ९० प्रतिशत तक फसलें खराब हो गई है। उनका कहना है जिस क्षेत्र में चारों तरफ से सिंचाई सुविधा मिल रही है, वहां पर ज्यादा नुकसान नहीं है। लेकिन नोहर के अधिकांश क्षेत्र में बारानी क्षेत्र में बिजाई होने के कारण किसानों को ज्यादा नुकसान हो रहा है। अरंडी के अलावा सरसों की फसल को भी पाला मारने की आशंका पहले थी। लेकिन मौसम खुलने के कारण अब इस फसल से खतरा टलने की बात अधिकारी कह रहे हैं।
भूमि के लिए अच्छा
कृषि अधिकारियों का कहना है कि अरंडी की खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। इस तरह भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिहाज से अरंडी की फसल अच्छी है। फरवरी-मार्च में यह फसल पूरी तरह से तैयार होती है और फसल उत्पादन का मुख्य समय इसी को माना जाता है। मगर इस बार पाले के कारण फसल खराब हो रही है।
बाजार में अच्छे भाव
अरंडी के बाजार भाव इस वर्ष अच्छे चल रहे हैं। कृषि विभाग के सहायक निदेशक बलवीर खाती के अनुसार वर्तमान में इसके भाव ५००० रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है। इसी तरह सही प्रबंधन करने पर प्रति हेक्टेयर ३० क्विंटल अरंडी का उत्पादन होता है। नोहर में १८०० व भादरा में ८०० हेक्टेयर में अरंडी की बिजाई हुई है। इस तरह जिले में करीब ८६०० हेक्टेयर में कुल बिजाई की गई है। किसान फसल बीमा योजना में अरंडी को शामिल करने की मांग कर रहे हैं।
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